विजय नीमा -बड़नगर तहसील के ग्राम जस्साखेड़ी में कई वर्षों से लंबित विवाद में आज हाई कोर्ट के आदेश के पालन में तहसीलदार माला राय, एसडीओपी महेंद्र सिंह परमार, थाना प्रभारी अशोक पाटीदार सहित भाटपचलाना व इंगोरिया थाने के फोर्स के मौजूदगी में तहसीलदार माला राय ने आवेदक मदन लाल पिता महादेव को जस्सा खेड़ी स्थित श्री राम मंदिर के आसपास की भूमि पर जिसे आवेदक महादेव द्वारा न्यायालय में अपनी भूमि साबित कर दिया और हाई कोर्ट से अपने भूमि का कब्जा दिलाने के लिए आदेश प्राप्त किया हाई कोर्ट के आदेश के पालन में आवेदक को तहसीलदार माला राय ने मौके पर सीमांकन कर कब्जा दिलाया गया वही पंडित मदन मोहन शास्त्री द्वारा बताया गया हम कई पीढ़ियों से जस्साखेड़ी के राम मंदिर की पूजा करते थे, इस क्रम में मेरे पिताश्री महादेव जी ने भी पूजा पाठ किया है, गांव के असामाजिक तत्वों ने मेरे पिता को बेघर करते हुए गांव छोड़ने को मजबूर किया जिसका मुख्य कारण मंदिर की 50 बीघा जमीन जो कि तत्कालीन जागीरदार साहब ने मंदिर बना कर उक्त 50 बीघा कृषि भूमि मंदिर की सेवा ओर अपने परिवार का लालन पालन करने के लिए दी थी जो कथित असामाजिक तत्वों की नजर में। खटक रही थी। इन असामाजिक तत्वों ने मेरे पिता को झूठे झूठे इल्जाम लगा कर और मेरे परिवार के विरुद्ध माहौल बना कर हमे गांव छोड़ने पर मजबूर किया। हमारे गांव छोड़े जाने के बाद लोगों ने मेरे पैतृक मकान ओर बाड़े पर अवैध अतिक्रमण कर परेशान करने का प्रयास किया। पिता की मृत्यु के बाद उक्त मकान व बाड़े पर मेरा फौती नामांतरण हुआ। जिसमें मुकेश गुलाबदास बैरागी व मोहन पिता धन्ना गारी ने मेरे मकान ओर बाड़े पर अतिक्रमण कर लिया था, जिसको लेकर मेरे न्यायालय की शरण ली जिसपर 15 जनवरी 2018 को अनुविभागीय अधिकारी बड़नगर ने तहसीलदार को आदेश किया कि 15 दिवस में अतिक्रमण हटा कर मालिक को कब्जा देवें, परंतु तहसील टीम यहां आई तो अतिक्रमणकारियो ने विरोध कर राजस्व अमले को वापस कर दिया, इस प्रकार ऐसा छह बार राजस्व अमले के साथ हुआ। जिसमें फरियादी का लाखों का खर्च भी बेकार गया। यहां से कमिश्नर महोदय उज्जैन, सिविल कोर्ट बड़नगर, जिला कोर्ट बड़नगर, हाईकोर्ट इंदौर तक संघर्ष करना पड़ा तथा सभी न्यायाधीशों ने फैसला मेरे पक्ष में दिया। जब कब्जा नहीं मिल पाया तो मेरे द्वारा पुनः उच्च न्यायालय की शरण ली गई। पश्चात न्यायालय ने 5 मई 2024 को उज्जैन कलेक्टर महोदय को आदेश किया जिसमें कलेक्टर जो तीस दिवस में अतिक्रमण हटा कर कब्जा दिलाने का आदेश दिया पश्चात 30 दिवस गुजर गए किंतु कोई हल नहीं निकला तो मुझ आवेदक द्वारा पुनः उच्चनायलय की शरण लेते हुए कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज करवाया गया। जिसके परिपालन आज तहसीलदार महोदय, राजस्व अमला तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बड़नगर, बड़नगर टीआई व अन्य थाने के पुलिस बल के साथ मेरे मकान और बाड़े का अतिक्रमण हटवाया है।
