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September 15, 2026 12:53 am

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15 दिसंबर 2024 की रात से मलमास की शुरुआत है*शुभ मांगलिक कार्य होगे वर्जित

15 दिसंबर 2024 की रात से मलमास की शुरुआत है*शुभ मांगलिक कार्य होगे वर्जित

मलमास को खरमास के नाम से भी जाना जाता है

मलमास को अशुभ और अशुद्ध महीना माना जाता है.और इस दौरान विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। सूर्य द्वारा बृहस्पति की राशि धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करने पर मलमास या खरमास लगता है। 15 दिसंबर 2024 से मलमास की शुरुआत है।
मलमास की शुरुआत भले ही साल 2024 के आखिरी महीने 15 दिसंबर को हो रही है, लेकिन इस मास की समाप्ति 14 जनवरी 2025 में होगी। सूर्य द्वारा धनु राशि से निकलकर जब दूसरी राशि में प्रवेश किया जाएगा तो मलमास समाप्त हो जाएगा।

मलमास के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
नया घर खरीदना या गृह प्रवेश करना मना है।
नए व्यापार की शुरुआत न करें।
शादी, मुंडन, जनेऊ, सगाई आदि कार्य न करें।
16 संस्कारों वाले कार्य करने की मनाही है।
मलमास के दौरान क्या करना चाहिए?
प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें।
पक्षि और पशुओं की सेवा करें।
भगवान विष्णु और तुलसी पूजा करें।
जप, तप और दान का भी खास महत्व है।
गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना जरूरी।
मलमास गुरुवार पर केले का दान करें।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर बैठ कर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा के दौरान सूर्य का रथ एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। लेकिन निरंतर चलते रहने से तथा सूर्य की गरमी से घोड़े प्यास और थकान से व्याकुल होने लगे। घोड़ों की यह दयनीय दशा देखकर सूर्य देव उन्हें विश्राम देने के लिए और उनकी प्यास बुझाने के उद्देश्य से रथ रुकवाने का विचार करते हैं।

लेकिन उन्हें अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आता है कि वे अपनी इस अनवरत चलने वाली यात्रा में कभी विश्राम नहीं लेंगे। विचार करते हुए सूर्य देव का रथ आगे बढ़ रहा था। तभी सूर्य को एक तालाब के पास दो खर (गधे) दिखाई दिए। उनके मन में विचार आया कि जब तक उनके रथ के घोड़े पानी पीकर विश्राम करते हैं, तब तक इन दोनों खरों को रथ में जोतकर आगे की यात्रा जारी रखी जाए। ऐसा विचार कर सूर्य ने अपने सारथि अरुण को उन दोनों खरों को घोड़ों के स्थान पर जोतने की आज्ञा दी। सूर्य के आदेश पर उनके सारथि ने खरों को रथ में जोत दिया। खर अपनी मंद गति से सूर्य के रथ को लेकर परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ गए।

मंद गति से रथ चलने के कारण सूर्य का तेज भी मंद होने लगा। सूर्य के रथ को खरों द्वारा खींचने के कारण ही इसे ‘खर’ मास कहा गया है। खर मास साल में दो बार आता है। एक, जब सूर्य धनु राशि में होता है। दूसरा, जब सूर्य मीन राशि में आता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रभाव यानी तेज पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध पर नहीं पड़ता। सूर्य की इस कमजोर स्थिति के कारण ही पृथ्वी पर इस दौरान गृह-प्रवेश, नया घर बनाने, नया वाहन, मुंडन, विवाह आदि मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। किसी नए कार्य को शुरू नहीं किया जाता। लेकिन इस मास में सूर्य और बृहस्पति की अराधना विशेष फलदायी होती है।

गुरुण पुराण के अनुसार खर मास में प्राण त्यागने पर सद्गति नहीं मिलती। इसलिए महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपने प्राण खर मास में नहीं त्यागे थे। उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। ध्यान देने की बात है कि खर मास और मल मास में अंतर है। सूर्य के धनु और मीन राशि में आने पर खर मास होता है। यह साल में दो बार आता है।
श्री मांतगी ज्योतिष केंद्र ज्योतिर्विद प अजय कृष्ण शंकर व्यास
मोबाइल नंबर 8871304861
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Mp Bulletin
Author: Mp Bulletin

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