समाजसेवा मिसाल कायम करते हुए पूरे किए 13 सफल वर्ष
इंदौर, 16 जनवरी, 2026: उम्र के उस पड़ाव पर, जहाँ अपनत्व और हमउम्र साथियों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहाँ इंदौर स्थित आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर पिछले 13 वर्षों से बुज़ुर्गों के जीवन में सहारा, सक्रियता और आत्मसम्मान का संबल बना हुआ है। 16 जनवरी को आनंदम ने अपनी 13वीं वर्षगाँठ उत्साहपूर्वक मनाई। ये 13 वर्ष केवल समय का आँकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों मुस्कुराहटों, मित्रता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रमाण हैं। स्थापना दिवस पर आनंदम परिवार के सभी सदस्यों ने संस्था के सतत विकास हेतु निरंतर योगदान देने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के उद्देश्य से स्थापित आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर आज शहर की एक विश्वसनीय सामाजिक संस्था बन चुका है। यहाँ आने वाले बुज़ुर्ग इसे केवल डे-केयर सेंटर नहीं, बल्कि अपना दूसरा घर मानते हैं, जहाँ वे खुलकर संवाद करते हैं, मुस्कुराते हैं और जीवन के इस चरण को सार्थक बनाते हैं।
संस्था के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह ने कहा, “वर्ष 2013 में सीमित साधनों, भाटिया परिवार के सहयोग और चार साथियों के साथ आनंदम की शुरुआत हुई थी। सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवनशैली, सामाजिक सहभागिता और रचनात्मक अभिरुचि को केंद्र में रखकर यहाँ विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए गए, जिनका संचालन स्वयं सदस्यों ने संभाला। आज आनंदम का कैलेंडर गतिविधियों से भरा रहता है। विद्या, कम्प्यूटर वितरण और अन्न कलश जैसी सामाजिक पहलें निरंतर संचालित की जा रही हैं। वरिष्ठजनों को मंच देने हेतु ‘वॉइस ऑफ सीनियर्स’ प्रतियोगिता वर्षों से आयोजित हो रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में आनंदिनी समूह का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व श्रीमती गुरवीन भाटिया कर रही हैं।”
संस्था के सचिव श्री एस. बी. खंडेलवाल ने कहा, “13 वर्षों में आनंदम ने जो पहचान बनाई है, उसका श्रेय सभी सेवाभावी सदस्यों और गतिविधि समन्वयकों के परिश्रम को जाता है। हम मानते हैं कि 55 के बाद यदि बचपन जीने का अवसर मिले, तो उम्र केवल एक संख्या रह जाती है। समय के साथ जरूरतें बदलती हैं और आनंदम ने हर दौर में स्वयं को अपडेट किया है, ताकि प्रत्येक सदस्य खुद को सक्रिय, उपयोगी और सम्मानित महसूस करे।”
डेढ़ दशक की ओर बढ़ती इस यात्रा में आनंदम ने समय के अनुरूप कई नए आयाम जोड़े हैं। खेल गतिविधियों के अंतर्गत कैरम और टेबल टेनिस जैसे इनडोर खेल नियमित रूप से संचालित किए जाते हैं। इनकी प्रतियोगिताएँ न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि बुज़ुर्गों को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय रखने में भी सहायक सिद्ध हो रही हैं।
समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आनंदम द्वारा ‘आनंदिनी’ पहल के माध्यम से जरूरतमंद बालिकाओं और परिवारों को सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही, डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कम्प्यूटर वितरण की पहल भी शुरू की गई है। इसके अंतर्गत आदिवासी बहुल क्षेत्रों के 7 स्कूलों को 50 कम्प्यूटर वितरित किए जा चुके हैं। डीडवानिया (रतनलाल) चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आगामी तीन वर्षों में 300 कम्प्यूटर वितरित करने की योजना है। साथ ही, जरूरतमंद विद्यार्थियों को नोटबुक वितरण की योजना भी प्रस्तावित है।
आनंदम की पहचान यही है कि यह स्वयं को केवल वरिष्ठ नागरिकों तक सीमित नहीं रखता। वर्ष 2016 से संचालित ‘विद्या’ छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत अब तक 938 छात्राओं को 49 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।
वरिष्ठ नागरिकों की गायन प्रतिभा को मंच देने वाली ‘वॉइस ऑफ सीनियर्स’ प्रतियोगिता के सात सफल संस्करण इस बात का प्रमाण हैं कि उम्र प्रतिभा की सीमा नहीं होती। वर्ष 2025 में इसके सातवें संस्करण में 282 प्रतियोगियों ने भाग लिया और यह प्रतियोगिता अब राष्ट्रीय स्तर की बन चुकी है। इसके साथ-साथ नियमित स्वास्थ्य जाँच शिविर और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
13 वर्षों की इस सतत यात्रा में आनंदम सीनियर सिटीजन सेंटर ने यह सिद्ध किया है कि सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि रिश्तों का निर्माण भी करती है और यही आनंदम की असली पहचान है।


